कश्मकश

एक बँद कमरा है ख्वाइशों का
बँद खवाब के दरवाज़े और खिड़कियां है
ऐश ओ आराम बिखरा हर तरफ़
फ़िर भी साँस आती नही,दम घुटता है
आसमान दिखता नही साफ यहाँ से
पर ज़माना तालियां बजाता है
दिखावटी रेनबसेरों के शहर का
कैसा आँखों पर बनाबटी चश्मा है !